Saturday, June 27, 2026
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मायावती के ऐतिहासिक काम

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बहन कुमारी मायावती
बहन कुमारी मायावती

कांग्रेस को क्यों कहा जाता है दलित विरोधी

मायावती ने मुख्यमंत्री रहते हुए विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाया जाए जिसको कांग्रेस की केंद्र सरकार ने ठंडा बस्ते में डाल दिया था

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति बेहद पेचीदा होती जा रही है बसपा अध्यक्ष मायावती ने अपनी पहली चुनावी सभा सहारनपुर में यह घोषणा करके बड़ा धमाका किया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाया जाएगा और उत्तर प्रदेश हाई कोर्ट की एक खंडपीठ इसी क्षेत्र में स्थापित की जाएगी।

पश्चिम उत्तर प्रदेश की राजनीति में अलग राज्य एक बड़ा मुद्दा है जिस पर सभी राजनीतिक पार्टियों बटती नजर आ रही है. बसपा उत्तर प्रदेश को चार भागों में विभाजित कर बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था की बात करती है. 2011 में मायावती ने मुख्यमंत्री रहते हुए विधानसभा में उत्तर प्रदेश को पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वांचल, बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के रूप में विभाजित करने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार के पास भी भेजा था जिस पर कांग्रेस की केंद् सरकार ने इसे ठंडे बस्ती में डाल दिया था. सपा और भाजपा भी इसके विरोध में खड़ी नजर आती है।

पिछले दिनों भाजपा के केंद्रीय मंत्री एवं सांसद संजीव बालियान ने अंतरराष्ट्रीय जाट महासभा में हरित प्रदेश का शिगूफा का छोड़ते हुए इस क्षेत्र में राजनीति को गर्मा दिया था। भाजपा के सांसद के बयान के बाद भाजपा में भी खलबली मची थी और भाजपा के क्षेत्रीय नेता संगीत सोम ने इस बात का जोरदार विरोध किया था. जबकि राष्ट्रीय लोक दल अलग राज्य की पक्षधर है।

मायावती के ऐलान के बाद पश्चिम उत्तर प्रदेश के लोकसभा चुनाव में यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है जिसकी पृष्ठभूमि में इस क्षेत्र का जातिगत समीकरण है. यह माना जाता है कि करीब 32% मुस्लिम 17% जाट और 26% दलित मतदाता इस क्षेत्र के निर्णायक मतदाता है।

यही कारण है कि 2019 में सहारनपुर ,बिजनौर, नगीना और अमरोहा सीट पर बसपा का कब्जा था और मेरठ लोकसभा भी कुछ हजार मतों से ही बसपा हार गई थी।

देखा जाए तो पश्चिम उत्तर प्रदेश में इस बार भाजपा को कड़ी चुनौती बसपा के द्वारा मिलेगी . इस मांग के बाद जाट , मुस्लिम ओर दलित मतदाता के अलावा भी सैनी ,पाल, गुर्जर और यादव मतदाता भी प्रभावित होंगे. चुनाव परिणाम क्या होगा यह 4 जून पता लगेगा लेकिन मायावती के दाव की काट भाजपा और सपा कांग्रेस गठबंधन को ढूंढना होगा.

विरेंद्र कुमार

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